मध्यप्रदेश में प्रमुख आन्दोलन एवं स्वतंत्रता संग्राम Mp gk in hindi

भोपाल का जलियांवाला कांड :

तिथि - 14 जनवरी 1949
स्थान - नर्मदा  नदी के किनारे बोरास गॉव ( वर्तमान जिला रायसेन )
कारण - नर्मदा नदी के किनारे तिरंगा फहराने के कारण ( क्योँकि भोपाल आजाद नहीं होना चाहता था )
स्पष्टीकरण : भोपाल के नवाव हमीदुल्लाह खां की सेना के अधिकारी 'जाफर अली खां' और स्थानीय लोगों के मध्य झगड़ा हो गया। जिसके परिणामस्वरूप नवावी सेना ने बैजनाथ गुप्ता, मंगलसिंह, विशालसिंह, वीरधनसिंह और छोटेलाल की गोली मारकर हत्या कर दी। 

राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन MP GK

बर्ष 1901 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में प्रदेश के स्वतन्त्रता सेनानी डॉ. हरिसिंह गौर  न्याय विभाग और शासन विभाग को अलग करने की मांग की थी तथा 1904 में अंग्रेजी शिक्षा पद्धति का विरोध किया था। इन्होने सागर में बर्ष 1946 में मध्यप्रदेश के प्रथम विश्वविद्यालय का निर्माण किया। 1946 में निर्मित इस विश्वविद्यालय का नाम सागर विश्वविद्यालय था फिर बाद में सन 1983 में इस विश्वविद्यालय का नाम बदलकर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय रख दिया गया। 
➫ इसी समय खंडवा से सुबोध सिंधु तथा जबलपुर टाइम्स पत्रिकाओं द्वारा स्वतंत्रता के लेख लिखे जाने लगे। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने अपने समाचार पत्र कर्मवीर के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का विस्तार किया।
नोट : कर्मवीर एक हिंदी पत्रिका थी। पत्रकारिता के पितृ पुरुष माधवराव सप्रे की प्रेरणा से इसका प्रथम प्रकाशन 17 जनवरी 1920 को जवलपुर से हुआ था। इसके प्रथम सम्पादक माखनलाल चतुर्वेदी थे। नवम्बर 1922 तक यह पत्रिका जवलपुर से निकलती थी, किन्तु बाद में इसका प्रकाशन खंडवा से होने लगा। वर्ष 1906 में मध्यप्रदेश कांग्रेस का प्रांतीय अधिवेशन जवलपुर में आयोजित हुआ तथा बालगंगाधर तिलक से प्रेरित होकर बर्ष 1915 ई. में जबलपुर होमरूल लीग का गठन किया। 

असहयोग आंदोलन :

➫ देश में असहयोग आंदोलन की शुरुआत 1 अगस्त 1920 से महात्मा गांधी ने की थी जो फरवरी 1922 तक चला। 
➫ मध्यप्रदेश में जवलपुर के बिक्टोरिया टॉऊन हॉल ( वर्तमान गाँधी भवन ) में सर्वप्रथम दमोह निवासी श्री प्रेमचंद उस्ताद ने झंडा लहराया था। 
नोट : प्रेमचंद उस्ताद का जन्म खंडवा में हुआ था। 
➫ महात्मा गाँधी जी ने 10 बार मध्यप्रदेश की यात्रा की जिसमे तीसरी यात्रा के दौरान वे 6 जनवरी 1921 को छिंदवाड़ा पहुंचे जहां उन्होंने असहयोग आंदोलन के लिए मध्यप्रदेश की जनता को प्रेरित किया। 
नोट : मध्यप्रदेश के हरदा को प्रदेश का चक्रव्यूह कहते हैं। 

झंडा सत्याग्रह :

तिथि : 8 मार्च 1923 
स्थान : जबलपुर 
कारण : नगरपालिका भवन पर झंडा फहराने को लेकर विवाद। 
परिणाम : सरकार प्रतिबन्ध की अवहेलना करने पर सुंदरलाल शर्मा को 6 माह कारावास दिया गया। 
नोट : 18 अगस्त 1923 को ब्रिटिश अधिकारीयों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुलूस निकालने की अनुमति दी। 

घोड़ा डोंगरी सत्याग्रह :

तिथि : 1930 
स्थान : घोडा डोंगरी ( बैतूल )
कारण : अंग्रेजी अधिकारियों द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में किये जा रहे हस्तक्षेप के बिरोध में। 
नेतृत्वकर्ता : द्वारका प्रसाद मिश्रा, लालाराम बाजपेयी 
स्पष्टीकरण : इस सत्याग्रह पर सर्वाधिक प्रभाव 'गुंजन सिंह कोरकू' का रहा जो अंग्रेजों को चुनौती देने के लिए इस नेतृत्व में शामिल हुए। किन्तु 'बंजारे सिंह कोरकू' इसके मुख्य नेतृत्वकर्ता थे। 

मध्यप्रदेश में प्रमुख आन्दोलन एवं स्वतंत्रता संग्राम Mp gk in hindi

नोट - द्वारका प्रसाद मिश्रा को मध्यप्रदेश की राजनीति के चाडक्य कहे जाते हैं, जबकि भारत की राजनीति के चाडक्य P.V. नरसिंह राव को कहा जाता है। 
➫ मध्यप्रदेश के वर्तमान सिवनी जिले में जंगल सत्याग्रह की शुरुआत सेनापति 'ओखा लौहार' द्वारा 1930 में की गई थी। 
➫ यह पचधार नदी के पास नागपुर के समीप 'टुरिया गॉव' से प्रारम्भ हुआ जिसका नेतृत्व 'दुर्गाशंकर मेहता' कर रहे थे। 

नमक सत्याग्रह :

तिथि : 6 अप्रैल 1930 
स्थान : जबलपुर 
कारण : नमक के एकाधिकार के विरोध में। 
नेतृत्वकर्ता : सेठ गोविंददास एवं पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र। 
नोट - सिवनी जिले के श्री दुर्गाशंकर मेहता ने गांधी चौक में नमक बनाकर शिवनी में नमक सत्याग्रह की शुरुआत की। इसके अलावा खंडवा, सीहोर जिलों में भी इसका विरोध हुआ। 

पंजाब मेल हत्याकांड :

तिथि : 23-24 जुलाई 1931 
स्थान : खंडवा 
➫ दमोह निवासी वीर यशवंत सिंह, देवनारायण तिवारी और दलपत राव ने दिल्ली से मुंबई जा रही पंजाब मेल रेल में बैठे अंग्रेज अधिकारी हैक्सल, मेजर शाहन और उनके पालतू कुत्ते की हत्या कर दी। 
➫ 10 अगस्त 1931 को क्रांतिकारियों के विरुद्ध खंडवा अदालत में मुकदमा चला। 
परिणाम : 11 दिसम्बर 1931 को जबलपुर में यशवंत सिंह और देवनारायण तिवारी को फांसी सजा दी गई एवं दलपत राव को काला पानी की सजा सुनाई गई। 

चरणपादुका नरसंहार :

तिथि : 14 जनवरी 1931 ( मकर संक्रांति के दिन )
स्थान : उर्मिल नदी के तट पर सिंहपुर चरणपादुका मैदान ( छत्तरपुर )
नोट - आयोजित हो रही आम सभा में नौगांव के अंग्रेज एजेंट 'कर्नल फिशर' के आदेश पर गोली चलाई गई जिससे 21 लोगों की मृत्यु हो गई और 26 लोग घायल हो गए थे। 
➫ चरणपादुका नरसंहार को मध्यप्रदेश का जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की संज्ञा दी जाती है। 
➫ इस हत्याकांड के बाद 1939 में बुंदेलखंड कांग्रेस समिति की स्थापना की गई जिसके पहले अध्यक्ष रामसहाय तिवारी बने। 

मध्यप्रदेश में प्रमुख आन्दोलन एवं स्वतंत्रता संग्राम Mp gk in hindi

परीक्षा उपयोगी तथ्य : बर्ष 1978 में रक्षा मंत्री बाबू जगजीवनराम द्वारा चरणपादुका बलिदान स्थल पर एक स्मारक का शिलान्यास किया  जिसका उद्घाटन 14 जनवरी 1984 को मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह द्वारा किया गया। 

रीवा का चावल सत्याग्रह :

तिथि : 28 फरवरी 1947 
स्थान : रीवा 
नेतृत्वकर्ता : त्रिभुवन तिवारी, भैरवप्रसाद उर्मलिया। 
नोट - रीवा राज्य में 'जबरिया' बसूली के विरोध में रीवा राज्य के सैनिकों द्वारा नेतृत्वकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसे ही रीवा का चावल आंदोलन कहा जाता है। 
➫ पद्मधर सिंह को रीवा-सतना का शेर कहा जाता है। 

कांग्रेस अधिवेशन :

➫ मध्य भारत में कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन 1891 में नागपुर में संपन्न हुआ जिसके अध्यक्ष 'पी. आनंद चार्लू' थे। 
➫ 29 जनवरी 1939 को त्रिपुरी जबलपुर में कांग्रेस का 52 वां अधिवेशन आयोजित हुआ जिसमें 'सुभाषचंद्र बोष' ने अध्यक्षता की। किन्तु गांधी जी से वैचारिक मतभेद होने के कारण बाद में इस्तीफा दे दिया और 'डॉ. राजेंद्र प्रसाद' अध्यक्ष बने। 

भारत छोड़ो आंदोलन :

➫ 9 अगस्त 1942 को प्रारम्भ हुए इस आंदोलन के चौथे दिन 12 अगस्त 1942 को बैतूल के प्रभात पटट्न बाजार में आंदोलनकारी भीड़ ने पुलिस वालों की वर्दी उतारकर उन्हें खादी वस्त्र धारण करवाए थे। इस आंदोलन के प्रमुख नेता 'शहीद महादेव तेली' थे। 
➫ 15 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में मंडला में जुलूस व सभा आयोजित की गई जिसका नेतृत्व 19 वर्षीय छात्र 'वीर उदयचंद्र' कर रहे थे। इस सभा में पुलिस ने बर्बरता से गोली चलाई जिसमें वीर उदयचंद्र शहीद हो गए। 
परीक्षा उपयोगी तथ्य : कुंवर चैनसिंह को मध्यप्रदेश का पहला शहीद ( 24 जून 1824 ई. ) और मध्यप्रदेश का मंगल पांडे कहा जाता है। 

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