General science expansion

कोशिका बिभाजन - इसकी खोज किरचोप ने 1855 में की। 
कोशिका विभाजन वह प्रक्रिया है , जिसमे नयी कोशका अपनी पूर्व की कोशिका से बनती है।
अर्थात नयी कोशिका के निर्माण की प्रक्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं।
कोशिका विभाजन तीन प्रकार के होते हैं -

1 . असूत्री कोशिका विभाजन - इसमें एक कोशिका से दो संततीय कोशिका बनती हैं।
 इस प्रकार का विभाजन जीवाणु , कवक , प्रोटोजोआ जन्तु में पाया जाता है। 
२. समसूत्री कोशिका विभाजन ( Mitosis cell Divition ) - इसकी खोज बैज्ञानिक वॉटर फ्लेमिंग ने की। 
इस प्रकार के विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका के समान होती है। 
इस प्रकार की कोशिका दैहिक या कैंसर कोशिका में पायी जाती है। 
३. अर्धसूत्री कोशिका विभाजन  इसकी खोज वैज्ञानिक बीजमैन ने की , किन्तु इसका नामकरण 
वैज्ञानिक फार्मर तथा मूल ने किया। 
इस प्रकार के कोशिका विभाजन में क्रोमोसोम की संख्या पैतृक कोशिका से आधी होती है। 
इस प्रकार का कोशिका विभाजन जर्म शैल में पाया जाता है।  
ऊतक - विज्ञान की वह शाखा जिसमें ऊतकों का अध्ययन किया जाता है , उसे हिस्टोलोजी कहते हैं। 
हिस्टोलोजी शब्द का प्रयोग वैज्ञानिक मायर ने किया। 
ऊतक के प्रकार - 
१. उपकला ऊतक (Epathilimiya)-इस प्रकार  का ऊतक शरीर की बाहरी त्वचा अमाशय , आंत , ग्रशनी
 की दीवारों पर पाया जाता है।  
इनमें अन्तः कोशकीय अवकाश नहीं पाया जाता।  इनकी कोशकाएँ एक-दूसरे के आस-पास होती हैं। 
इनमे बिसरण , श्रवण एवं अवशोषण की क्रिया पायी जाती है। 
२. संयोजी ऊतक - ये ऊतक शरीर  के बिभिन्न अंगों को एक - दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं। 
संयोजी ऊतक की कोशिकाएं एक - दूसरे से दूर - दूर होती हैं , इस कारण इनमें अंतर कोशिकीय अवकाश 
पाए जाते हैं। इनका प्रमुख कार्य शरीर के तापमान को नियंत्रित करना होता है। 
इस प्रकार के ऊतकों में कोशिकाओं की संख्या काम होती है।  
३. पेशीय ऊतक - इस प्रकार के ऊतक प्रचलन एवं विभिन्न प्रकार की गतियों से संबंधित अंगों में पाए जाते हैं। 
ये ऊतक निम्न 3 प्रकार क्र होते हैं - 
(A ) रेखिक पेशीय ऊतक - ऐसे कंकालीय पेशीय ऊतक एवं ऐच्छिक पेशीय ऊतक भी कहा जाता है। 
यह शरीर का लगभग 50  प्रतिशत भाग बनता है। 
प्रचलन एवं बिभिन्न प्रकार की क्रियायें इन्हीं ऊतकों के द्वारा संपन्न होती हैं। 
(B) अरैखिक पेशीय ऊतक - इस प्रकार का ऊतक शरीर के उन भागों में पाया जाता है , 
जिनकी क्रियाओं को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।  
इस कारण इन्हें अनैच्छिक पेशीय ऊतक भी कहा जाता है। 
रेखिक पेशीय ऊतक के सामान इनमें प्रोटीन के स्तर नहीं पाए जाते हैं। 
यह आंतरिक अंगों जैसे - रक्तवाहिका , मूत्राशय , आदि स्थानों पर पाए जाते हैं। 
(C) हृदय पेशीय ऊतक - ये पेशियाँ केवल हृदय की दीवारों पर पायी जाती हैं। 
ये पेशियाँ प्राणी की इच्छा से नियंत्रित नहीं होती हैं। ें पेशियों के तंतु लम्बे बेलनाकार और एक केंद्रीय होते हैं।  
इन पेशियों में संकुचन एवं विसरण जीवन भर चलता रहता है। 
४. तंत्रिका ऊतक - शरीर के समस्त अंगों एवं कार्यों में सामन्जस्य स्थापित करने वाले ऊतक को 
तंत्रिका ऊतक कहते हैं।जंतुओं के शरीर के मस्तिष्क , मेरुरज्जु तथा तंत्रिकाएं तंत्रिका ऊतक की वनी होती हैं।
 तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई तंत्रिका कोशिका न्यूरॉन होती है। 
तंत्रिका कोशिका निम्न तीन भागों से मिलकर बानी होती है - 
(A) SAITRON - यह तंत्रिका कोशिका का मुख्या भाग है , जिसके अंदर पाए जाने वाले
 द्रव्य को साइट्रोप्लाज्मा कहते हैं।  इसके कोशिका द्रव्य में अनेक प्रोटीन युक्त रंगीन कण पाये जाते हैं।
 जिन्हे निसल्स कहा जाता है
(B) Daindron - साइट्रो से निकले हुए तंतु जो एक से अधिक होते हैं , डेंड्रॉन कहलाते हैं। 

(C) Axon - साइट्रोन से शुरू होकर एक बहुत ही पतला एवं लम्बा तंत्रिका तंतु निकलता है , जिसे AXON कहते हैं।  यह एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन के बीच संदेश वाहक का कार्य करता है। 

रक्त ( Blood ) - रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है।  जिसका PH मान 7.4 होता है। 
यह सम्पूर्ण शरीर के भार का 7% भाग होता है।
एक सामान्य व्यक्ति में 4 से 5 लीटर रक्त पाया जाता है। 
यह सम्पूर्ण शरीर के भार का 7% भाग होता है।एक सामान्य व्यक्ति में 4 से 5 लीटर रक्त पाया जाता है। यह सम्पूर्ण शरीर के भार का 7% भाग होता है।एक सामान्य व्यक्ति में 4 से 5 लीटर रक्त पाया जाता है। यह सम्पूर्ण शरीर के भार का 7% भाग होता है।एक सामान्य व्यक्ति में 4 से 5 लीटर रक्त पाया जाता है। 

यह निम्न दो भागों से मिलकर बना होता है - 

1 . प्लाज्मा 2. रक्त कणिका। 

1. प्लाज्मा - यह सम्पूर्ण रक्त का 55 % भाग बनता है। प्लाज्मा में 90 % जल पाया जाता है। प्लाज्मा में पायी जाने वाली प्रोटीन एल्युबिन का निर्माण यकृत के द्वारा किया जाता है , जो परासरण दाब को नियंत्रित करती है। प्लाज्मा में पायी जाने वाली दूसरी प्रोटीन ग्लोब्युलिन का निर्माण भी यकृत में होता है , जो शरीर के प्रतिरोधक तंत्र में सहायता करती है। रक्त प्लाज्मा में पायी जाने   वाली प्रोटीन फाइब्रिनोजेन का निर्माण यकृत में होता है , जो रक्त का थक्का बनाने में सहायक होती है। 

2. रक्त कणिका - यह  रक्त का 45 % भाग  हैं।  

यह 3 प्रकार की होती हैं -

1 . लाल रक्त कणिका (RBC) - मनुष्य के RBC केन्द्रक बिहीन होते हैं किन्तु ऊँट की RBC में केन्द्रक 
पाया जाता है।
पुरुषों में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 50 लाख होती है , जबकि महिलाओं में लाल रक्त कणिकाओं की
 संख्या 45 लाख होती है।
रक्त में ऑक्सीजन परिवहन हीमोग्लोविन के द्वारा होता है। रक्त में RBC की संख्या अत्यधिक बाद जाने की
स्थिति को Polysaithemiya कहते हैं। प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं ( RBC ) की कब्र कहा जाता है।
क्योंकि इसमें मृत RBC का विखंडन होता है। 
पाया जाता है।पुरुषों में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 50 लाख होती है , जबकि महिलाओं में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 45 लाख होती है।रक्त में ऑक्सीजन परिवहन हीमोग्लोविन के द्वारा होता है। रक्त में RBC की संख्या अत्यधिक बाद जाने कीस्थिति को Polysaithemiya कहते हैं। प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं ( RBC ) की कब्र कहा जाता है।क्योंकि इसमें मृत RBC का विखंडन होता है। पाया जाता है।पुरुषों में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 50 लाख होती है , जबकि महिलाओं में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 45 लाख होती है।रक्त में ऑक्सीजन परिवहन हीमोग्लोविन के द्वारा होता है। रक्त में RBC की संख्या अत्यधिक बाद जाने कीस्थिति को Polysaithemiya कहते हैं। प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं ( RBC ) की कब्र कहा जाता है।क्योंकि इसमें मृत RBC का विखंडन होता है। पाया जाता है।पुरुषों में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 50 लाख होती है , जबकि महिलाओं में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 45 लाख होती है।रक्त में ऑक्सीजन परिवहन हीमोग्लोविन के द्वारा होता है। रक्त में RBC की संख्या अत्यधिक बाद जाने कीस्थिति को Polysaithemiya कहते हैं। प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं ( RBC ) की कब्र कहा जाता है।क्योंकि इसमें मृत RBC का विखंडन होता है। 

2. श्वेत रक्त कणिकाएं ( WBC ) - यह रक्त कोशिकाओं में सबसे बड़ी होती हैं।
 इनकी संख्या 5 हजार होती है एवं इनका  जीवन काल 10 - 12 दिन का होता है। 
 इनकी संख्या 5 हजार होती है एवं इनका  जीवन काल 10 - 12 दिन का होता है।  इनकी संख्या 5 हजार होती है एवं इनका  जीवन काल 10 - 12 दिन का होता है।  इनकी संख्या 5 हजार होती है एवं इनका  जीवन काल 10 - 12 दिन का होता है। 

यह कणिकाएं दो प्रकार की होती हैं - 1. कणिकामय 2. अकनिकामय। 

1. कणिकामय - यह निम्न तीन प्रकार की होती है। 

(A) वेसोफिल्स - यह नीले रंग की होती है , जो एलर्जी के लिए उत्तरदायी है। 

(B) इओसिनोफिल्स - यह लाल रंग की होती है जो परजीविओं को भक्षण करती है।बुखार आने पर इनकी संख्या में बृद्धिं हो जाती है। 

(C) न्यूट्रोफिल्स - यह जीवाणु भक्षण एवं पस ( पीव ) के निर्माण के लिए उत्तरदायी होती है। 

2. अकनिकामय - यह WBC दो प्रकार की होती है। 

(A) मोनोसाइट - यह अत्यधिक सक्रीय जीवाणु भक्षी कोशिका होती है। 

(B) लिम्फोसाइट - यह सबसे छोटी WBC है , जो जीवाणु भक्षी प्रकृति की नहीं होती है। यह शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।AIDS रोगी के शरीर में इनकी संख्या बहुत काम हो जाती है , जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। 

3. Blood Platelets ( थ्रम्बोसाइट्स ) - यह अनियमित आकर की कोशिकाएं हैं। जो अत्यधिक बड़ी कोशिका मेगाकेरिओसाईट के विखंडन से बनती हैं। रक्त में इनकी संख्या लगभग 3 लाख होती है। तथा इनका जीवन काल 7 दिन का होता हैं। 

रक्त स्कंदन ( Blood Clotting ) रक्त स्कंदन ऐसी प्रक्रिया है , जिसमे घुलनशील प्रोटीन फाइब्रोनोजेन , अघुलनशीन फाइब्रिन में परावर्तित हो जाती है रक्त स्कंदन कहलाती है। चोट लगने पर चोटग्रस्त स्थान से प्रोथ्रोम्बोप्लास्टिन स्रावित होता है , जो रक्त स्कंदन की प्रक्रिया को आरम्भ करता है।रक्त का थक्का जमने में 2 - 8 मिनट का समय लगता है। 

रक्त समूह ( Blood Group ) - 

क्त समूह  -  एंटीजन  -  एंटीबॉडी
 A            -   A        -    b
 B            -   B        -     a
AB          -   AB       -   ----
O           -   ----      -   ab

Blood Group की खोज वैज्ञानिक कार्ल लैंड स्टीनर , 1900 में की।मनुष्य में रक्त की विभिन्नता का कारण इसमें पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की प्रोटीन जिसे एंटीजन कहते है।एंटीजन एक विशेष प्रकार की प्रोटीन है , जी सदैव लाल रुधिर कणिकाओं की झिल्ली से लगी हुई होती है।यह दो प्रकार की होती है - एंटीजन A , एंटीजन Bएंटीबॉडी रुधिर प्लाज़्मा में पाई जाती है।यह दो प्रकार की होती है - एंटीबॉडी a , एन्टीबॉडी bइन एंटीजन और एंटीबॉडी के आधार पर मनुष्य में चार प्रकार के रक्त समूह पाए जाते हैं।मनुष्य में रक्त का आधान - एंटीजन A तथा एंटीबाडी a तथा एंटीजन B तथा एंटीबाडी b एक साथ नहीं रह सकते ऐसा होने पर ये आपस में मिलकर अत्यधिक चिपचिपे हो जाते है , जिससे रक्त नष्ट हो जाता है। इसे रक्त का अभिश्लेषण कहते हैं।अतः रक्त आधान में एंटीजन तथा  का तालमेल आबश्यक है।  रक्त समूह O को सर्वदाता तथा रक्त समूह AB को सर्वग्राह्यता रक्त समूह कहते हैं।रक्त समूह O में कोई एंटीजन नहीं पाया जाता।रक्त समूह AB में कोई एंटीबॉडी नहीं पाया जाता। 

RH - Factor -  इस एंटीजन की खोज लैंड स्टीनर तथा विनर ने की।  इसको Rhesus नाम के बन्दर में खोजा गया था।
जिन व्यक्तियों में यह तत्व पाया जाता है उसे RH + तथा जिन व्यक्तियों में यह तत्व नहीं पाया जाता उन्हें RH - कहते हैं। रक्त आधान के समय RH - Factor की जाँच की जाती है।
Rh + को Rh + का तथा Rh - को Rh - का रक्त दिया जाता है।
यदि Rh + रक्त वर्ग का रक्त Rh - रक्त वर्ग वाले व्यक्ति को  दिया जाता है तो अभिश्लेषण के कारण Rh - वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
यदि पिता का Rh + हो और माता का Rh - हो तो शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था में या जन्म के तुरंत बाद  मृत्यु हो जाती है।  इस बीमारी को अरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस कहते हैं। 
जिन व्यक्तियों में यह तत्व पाया जाता है उसे RH + तथा जिन व्यक्तियों में यह तत्व नहीं पाया जाता उन्हें RH - कहते हैं। रक्त आधान के समय RH - Factor की जाँच की जाती है।Rh + को Rh + का तथा Rh - को Rh - का रक्त दिया जाता है।यदि Rh + रक्त वर्ग का रक्त Rh - रक्त वर्ग वाले व्यक्ति को  दिया जाता है तो अभिश्लेषण के कारण Rh - वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।यदि पिता का Rh + हो और माता का Rh - हो तो शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था में या जन्म के तुरंत बाद  मृत्यु हो जाती है।  इस बीमारी को अरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस कहते हैं। जिन व्यक्तियों में यह तत्व पाया जाता है उसे RH + तथा जिन व्यक्तियों में यह तत्व नहीं पाया जाता उन्हें RH - कहते हैं। रक्त आधान के समय RH - Factor की जाँच की जाती है।Rh + को Rh + का तथा Rh - को Rh - का रक्त दिया जाता है।यदि Rh + रक्त वर्ग का रक्त Rh - रक्त वर्ग वाले व्यक्ति को  दिया जाता है तो अभिश्लेषण के कारण Rh - वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।यदि पिता का Rh + हो और माता का Rh - हो तो शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था में या जन्म के तुरंत बाद  मृत्यु हो जाती है।  इस बीमारी को अरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस कहते हैं। जिन व्यक्तियों में यह तत्व पाया जाता है उसे RH + तथा जिन व्यक्तियों में यह तत्व नहीं पाया जाता उन्हें RH - कहते हैं। रक्त आधान के समय RH - Factor की जाँच की जाती है।
Rh + को Rh + का तथा Rh - को Rh - का रक्त दिया जाता है।यदि Rh + रक्त वर्ग का रक्त Rh - रक्त वर्ग वाले व्यक्ति को  दिया जाता है तो अभिश्लेषण के कारण Rh - वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।यदि पिता का Rh + हो और माता का Rh - हो तो शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था में या जन्म के तुरंत बाद  मृत्यु हो जाती है।  इस बीमारी को अरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस कहते हैं। 


पाचन तंत्र ( Digestive system ) - 
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मनुष्य के पाचन की प्रक्रिया 5  चरणों में संपन्न होती है।  

अंतर्ग्रहण - भोजन का मुख में लेना अंतर्ग्रहण कहलाता है। भोजन का पाचन मुख से प्रारम्भ हो जाता है , लार ग्रंथि में पाया जाने वाला एंजाइम स्टार्च को माल्टोज में परिवर्तित कर देता है। लार एक और एंजाइम पाया जाता है , जिसे लाइसोजाइम कहते हैं यह भोजन में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है। * मेडक में लार ग्रंथियां नहीं पायी जाती। लार का PH मान 6. 8 होता है। 

अमाशय में पाचन - आमाशय में भोजन लगभग 4 घंटे रहता है। आमाशय द्वारा पायलोरिक ग्रंथियो से जठर रस निकलता है इसके साथ HCL स्रावित होता है , जो भोजन के साथ आये हुए हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। पेप्सिन एवं रेनिन एंजाइम आमाशय से स्रावित होते हैं। इसमें रेनिन एंजाइम दूध का पाचन करता है तथा पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करता है। 

छोटी आंत में पाचन - छोटी आंत में भोजन के पाचन की क्रिया पूर्ण होती है। यहाँ पर यकृत से निकलने वाला पित्त रस और अग्नाशय से निकलने वाला अग्नाशयी रस आकर मिलते हैं। जिनमें निम्न एंजाइम पाए जाते हैं - ट्रिप्सिन , एमाइलेज , लाइपेज। यकृत के द्वारा पित्त रस स्रावित होता है जिसमे कोई पाचक रस नहीं पाया जाता यह केवल वसा का पाश्चुरीकरण करता है। आंत की दीवारों पर प्रमुख एंजाइम पाए जाते हैं - माल्टेज , सुक्रोज , लेक्टोज। 

स्वांगीकरण - अबशोषित भोजन का शरीर के उपयोग में लाया जाना स्वांगीकरण कहलाता है। अपच भोजन को शरीर से बहार निकाल देना मल - त्याग कहलाता है। 
यकृत ( liver ) - यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। इसके द्वारा फाइब्रिनोजन नामक प्रोटीन का निर्माण होता है। जो रक्त का थक्का बनाने में सहायक होती है। हिपेरिन नामक प्रोटीन का निर्माण यकृत में होता है , यह शरीर के ताप को नियंत्रित बनाये रखती है। हिपेरिन प्रोटीन रक्त को शरीर के अंदर जमने से रोकती है। पित्ताशय - यह नाशपाती के आकर की संरचना है जिसमे यकृत से निकलने वाला पित्त रस एकत्रित होता है। पित्त पीले - हरे रंग का द्रव्य होता है , जिसका PH मान 7. 8 होता है। यह भोजन में आये हुए हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा वसा के पाश्चुरीकरण में सहायक होता है। 
पोषक तत्व - वे पदार्थ जो जीवों  में बिभिन्न प्रकार की जैविक क्रियाओं के सञ्चालन के लिए आवश्यक होते हैं , पोषक तत्व कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं - 
1.  अपचयकारी - वे पदार्थ जो शरीर अपचायक क्रियाओं का उत्पादन करते हैं। जैसे - विटामिन्स , आदि। आवश्यकता के आधार पर इन्हें दो भागों में बांटा गया है -
1. दीर्घ पोषक तत्व - ऐसे पोषक तत्व जिनकी शरीर को काफी ज्यादा मात्रा में आबश्यकता होती है , दीर्घ पोषक तत्व कहलाते हैं। जैसे - कार्बोहाइड्रेड , वसा , प्रोटीन। 
2. लघु पोषक तत्व - ऐसे पोषक तत्व जिनकी शरीर को काम मात्रा में आवश्यकता होती है , लघु पोषक तत्व कहलाते हैं। जैसे - विटामिन्स , खनिज लवण आदि। 
१. कार्बोहाइड्रेड - यह कार्वन , हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बने होते हैं। इसमें कार्वन , हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 1 :2 :1 के अनुपात में होता है। पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बोहाइड्रेड का उत्सर्जन किया जाता है। 
२. विटामिन - विटामिन शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1911 में फंक ने किया यह एक प्रकार के कार्वनिक योगिक हैं , जो  उपापचयिक क्रियाओं के लिए आबश्यक होते हैं। घुलनशीलता के आधार पर विटामिन दो  हैं। 1 . जल में घुलनशील विटामिन - विटामिन A , B2 .  वसा में घुलनशील विटामिन - विटामिन - A , D , E , K* विटामिन B12 में कोबाल्ट पाया जाता है। * विटामिन D एवं K का संश्लेषण हमारे शरीर में होता है एवं अन्य विटामिन को भोज्य पदार्थों के रूप में ग्रहण किया जाता है। 
उत्सर्जन तंत्र - 
जीवों के शरीर में उपापचयक प्रक्रमों से बने विषैले अपशिष्ट पदार्थ के निष्काशन को उत्सर्जन कहते हैं। 
उत्सर्जी पदार्थों के आधार पर जंतु निम्न प्रकार के होते हैं -
1 . कमोनोटेलिक जंतु - इन जंतुओं के द्वारा उत्सर्जी पदार्थों के रूप में अमोनिया को बाहार निकाला जाता है। 
उदाहरण - प्रोटोजोआ , मछली। 
2. युरिकोटेलिक जंतु - इन जंतुओं में उत्सर्जी पदार्थ यूरिक अम्ल होता है। 
जैसे - पेप्टाइल्स , पक्षी। 
3. योरियोटेलिक जंतु - इन जंतुओं में उत्सर्जी पदार्थ यूरिया होता है। 
मनुष्य का उत्सर्जी अंग किडनी ( वृक्क ) होता है , जो संख्या में होता है.
प्रत्येक वृक्क की लम्बाई 10 C.M. तथा चौड़ाई 5 C.M. एवं इसका भार 160 ग्राम होता है। 
वृक्क चारों ओर से एक झिल्ली द्वारा घिरा रहता है जिसे पेरिटोनियम झिल्ली कहते हैं। 
वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई नेफ्रोन होती है , प्रत्येक किडनी में नेफ्रोने की संख्या 10 से 12 लाख होती है। 
वृक्क के सम्पूरक अंग के रूप में यकृत कार्य करता है।  मात्रा का PH मान 6 होता है , अतः यह हल्का अम्लीय होता है। मात्रा का पीला रंग यूरोक्रोम के कारण होता है। मात्रा में रासायनिक संघटन की दृष्टि से 95 % जल , 2 % लवण , 2. 6 % यूरिया , 0. 3 % यूरिक अम्ल तथा शेष मात्रा में सोडियम और कैल्सियम आयन होते हैं। 
मूत्र स्राव की मात्रा बड़ जाने को डाइयोरेसिस कहते हैं। जो पदार्थ मूत्र स्राव की मात्रा को बढ़ाते हैं उन्हें डाइयूरेटिक पदार्थ कहते हैं। 
जैसे - चाय , कॉपी आदि। 
वृक्क में बनने बाली पथरी कैल्शियम ओक्जेलिट बनी होती है। 
जब किडनी खराव हो जाती है तब रक्त को एक अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा शुद्ध किया जाता है इस प्रक्रिया को डाइलेसिस कहा जाता है। 
* डाईविटीज में मूत्र के साथ शर्करा निकलती है। 
* पीलिया रोग में मूत्र के साथ पित्त लवण निकलते हैं। 
* हिमाटोरिया रोग में मूत्र के साथ रक्त निकलता है।
किडनी के काम न करने  पर रक्त में यूरिया की मात्रा बड़ जाती है जिसे यूरेमिया रोग कहते है। 
किडनी के अलावा मनुष्य में निम्न उत्सर्जी अंग हैं -
1. त्वचा - इस पर श्वेद ग्रंथियां पायी जाती हैं। जो पसीने का श्रावण करती हैं। 
2. फेंफड़ा - फेंफड़े द्वारा कार्वन-डाईऑक्ससाइड और कुछ हानिकारक वाष्पशील गैसों का उत्सर्जन किया जाता है। 
3. यकृत - यकृत कोशिकाओं के द्वारा अमोनिया को यूरिया में परावर्तित किया जाता है। 

श्वसन क्रिया - 
श्वसन ऐसी जैव रासायनिक क्रिया है जिसके द्वारा श्वसन अंग तथा बातावरणीय माध्यम के बीच ऑक्सीजन तथा कार्वन - डाइऑक्साइड का आदान - प्रदान होता है। 
श्वसन दो प्रकार का होता है -
1. वायुवीय श्वसन - यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। 
2. अवायुवीय श्वसन - यह वायु की अनुपस्थिति में होता है। 

मानव का श्वसन तंत्र - मानव का श्वसन तंत्र निम्न भागों से मिलकर बना है। 
1. नाक - यह श्वसन अंग का प्रथम  है। जो दो अंडाकार रचना के रूप में होता है प्रत्येक नासा छिद्र अलग - अलग कक्ष में खुलता है NASAL Chamber कहते हैं। 
2. ग्रसनी - प्रत्येक नासा छिद्र एक नलिका में खुलता है जिसे ग्रशनी कहते हैं। 
3. कण्ठ ( Laring ) - यह ग्रशनी को श्वास नली से जोड़ने का कार्य करती है इसका प्रमुख कार्य ध्वनि उत्पन्न करना होता है। इसकी दीवार पर उपास्थियों के नौ टुकड़े पाए जाते हैं तथा लचीले तंतुओं का बना स्वर कोस पाया जाता है। 
महिलाओं में स्वर कोस छोटा होता है जिसके कारण इनकी आवाज की तीब्रता उच्च होती है। 

All Selective Science Question - 

  • क्‍वाशियोरक रोग किसकी कमी से होता है – प्रोटीन
  • यौन- संबंधों द्वारा फैलने वाला रोग है – एड्स
  • किसकी कुसक्रियता के कारण गलगंड रोग उत्‍पन्‍न होता है – थायरॉक्‍सीन ग्रंथि का
  • चन्‍द्रग्रहण तब होता है जब – सूर्य एवं चन्‍द्रमा के मध्‍य पृथ्‍वी आ जाती है
  • समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्‍ब होता है – आभासी
  • भारी जल का क्‍वथनांक होता है – 101.4
  • नाभिक का आकार होता है – 10¯¹⁵ मी.
  • बैरोमीटर के पारे का तल एकाएक गिरना प्रदर्शित करता है – आंधी एवं तुफान को
  • विदुत आवेश की M.K.S. पद्धति में मात्रक होता है – कुलॉम
  • कौन अतिशीतलित द्रव कहलाता है – शीश (कांच)
  • सल्‍फ्यूरिक अम्‍ल का ऐनहाइड्राइड है – SO₃
  • पारा आसानी से प्राप्‍त किया जाता है – सिनेबार से
  • बादल वायुमंडल में तैरते है – अल्‍प घनत्‍व के कारण
  • प्रकाश तरंगे है – विदुत चुम्‍बकीय अनुप्रस्‍थ तरंगे
  • श्‍वसन के दौरान सर्वाधिक मात्रा में ली गई गैस होती है – नाइट्रोजन
  • पृथ्‍वी का निकटतम ग्रह है – शुक्र
  • एक सामान्‍य व्‍यक्ति के लिए स्‍पष्‍ट-दृष्टि की न्‍यूनतम दूरी होती है – 25 सेमी.
  • ‘किसी गैस की आंतरिक उर्जा तापक्रम का एक फलन है’ यह कथन किसका है – चार्ल्‍स के नियम का
  • वोल्‍टीय सेल में विदुत अपघट्य क्‍या है – गंधक का अम्‍ल
  • हेक्‍सा ब्‍लेड किसके बने होते है – उच्‍च कार्बन इस्‍पात से
  • ‘ऐराबिका’ किसका एक प्रकार है – फूल का
  • विदुत चुम्‍बक किसका बना होता है – नरम लोहे का
  • जड़त्‍व आघुर्ण का मात्रक क्‍या है – किग्रा-मी.³
  • गैस टरबाइन किस चक्र पर आधारित है – ब्रेटान चक्र पर
  • गैस वेल्डिंग में सामान्‍यतया प्रयुक्‍त ईंधन गैस है – ऐसीटिलीन
  • ‘इलेक्‍ट्रॉन-वोल्‍ट’ मात्रक है – ऊर्जा का
  • ‘ऑयल ऑफ विट्रियोल’ किसे कहा जाता है – H₂SO₄
  • पृथ्‍वी के भूपटल में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली धातु है – ऐल्‍युमिनियम
  • पृष्‍ठ-तनाव का SI मात्रक है – न्‍यूटन/मीटर
  • ध्‍वनि यात्रा करती है – अनुदैर्ध्‍य तरंगों के रूप में
  • ‘एक हार्स पावर’ बराबर होता है – 746 वाट के
  • एण्‍डोस्‍कोप यंत्र से जांची जाती है – शरीर के अंदरूनी अंग का
  • मानव रक्‍त का रंग लाल होता है – हीमोग्‍लोबिन के कारण
  • गर्म करने पर जल का घनत्‍व – पहले बढ़ता है फिर घटता है
  • ध्‍वनि की प्रबलता किस पर निर्भर करती है – आयाम पर
  • एक एंग्‍स्‍ट्रम बराबर होता है – 10¯¹⁰मी. के
  • पाराबैंगनी किरणों का अवशोषण करती है – ओजोन गैस
  • कोलेस्‍ट्रोल का संबंध किससे है – वसा से
  • न्‍यूटन के गुरूत्‍वार्षण का कौन-सा नियम बल को परिभाषित करता है – पहला
  • विषाणु में किस प्रकार की प्रोटीन पायी जाती है – RNA व DNA
  • विदुत धारा के चुम्‍बकीय प्रभाव को खोजा था – आस्‍ट्रेड ने (1812ईं)
  • ELISA क्‍या है – प्रतिरक्षात्‍मक जांच
  • आलू क्‍या है – तना
  • विटामिन-‘सी’ का रासायनिक नाम क्‍या है – एस्‍कार्बिक अम्‍ल
  • आतिशबाजी में हरा रंग का कारण होता है – बेरियम ऑक्‍साइड
  • एंग्‍स्‍ट्रम यूनिट माप बताता है – तरंगदैर्ध्‍य का
  • मानव द्वारा श्रव्‍य ध्‍वनि तरंगों की आवृति है – 20Hz से 20000Hz
  • स्‍टील में कार्बन की प्रतिशत होता है – 0.1 से 1.5
  • शुद्ध जल का pH मान कितना होता है – 7
  • एनीमिया रोग किसकी कमी से होता है – लोहा
  • मधुमेह का रोग किसकी कमी से होता है – इन्‍सुलिन
  • पानी के अंदर ध्‍वनि सुनने का यंत्र कहलाता है – हाइड्रोफोन
  • गुरूत्‍वीय त्‍वरण g का मान होता है – 9.8मी./सें.
  • गाजर किस विटामिन का स्‍त्रोत है – विटामिन-A
  • डेसीबल से क्‍या मापा जाता है – ध्‍वनि की तीव्रता
  • किसी विदुत तापक की कुंडलिनी बनी होती है – नाइक्रोम का
  • डायनेमों किस सिद्धांत पर कार्य करता है – फैराडे के नियम
  • प्रशीतित में तापस्‍थायी का मुख्‍य कार्य क्‍या है – तापक्रम को नियंत्रण करना
  • हैजा का संक्रमण किसके द्वारा होता है – जीवाणु
  • गुरूत्‍वाकर्षण का नियम किसने दिया – न्‍यूटन ने
  • साधारण नमक का रासायनिक नाम क्‍या है – सोडियम क्‍लोराइड
  • आग बुझाने वाली गैस कौन-सी है – कार्बन डाइऑक्‍साइड
  • फ्यूज का तार बना होता है – टिन एवं सीसा का
  • शुष्‍क सेल में कौन-सी ऊर्जा होती है – रासायनिक
  • सूर्य में कौन-सा तत्‍व सर्वाधिक मात्रा में रहता है – हाड्रोजन
  • पाचन के रसों में कौन-सा अम्‍ल पाया जाता है – हाइड्रोक्‍लोरिक अम्‍ल
  • भाप का अतितापन किस दाब पर किया जाता है – अचर दाब
  • -273तापमान क्‍या कहलाता है – परम शून्‍य ताप
  • दियासलाई के शीर्ष में लगा फॉस्‍फोरस होता है – लाल फॅास्‍फोरस
  • बरनौली का प्रमेय किसकी व्‍याख्‍या करता है – ऊर्जा के सरंक्षण
  • प्रतिबल का मात्रक है – न्‍यूटन/मी.³
  • स्‍नेल का नियम किससे संबंधित है – प्रकाश के अपवर्तन से
  • प्रोड्यूसर गैस किसका मिश्रण है – Co+N का
  • किस अंग को रक्‍त आरक्षण बैंक कहा जाता है –प्‍लीहा
  • एक रॉकेट काम करता है – रेखीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत पर
  • प्रत्‍यवर्ती धारा को दिष्‍टधारा में बदलती है – रेक्टिफायर
  • डेनियल सेल में प्रयुक्‍त विदुत अपघट्य है – H₂SO₄
  • विदुत अपघटन में किसका प्रयोग होता है – फैराडे के नियम का
  • फलस्‍क का विदुत चुम्‍बकीय इकाई क्‍या होता है – बेवर
  • ट्रांसफार्मर का कोर किसका बना होता है – नर्म लोहे का
  • घर्षण विदुत के आविष्‍कारक थे – थेल्‍स
  • ध्‍वनि कौन-सी तरंग होती है – अनुदैर्ध्‍य तरंग
  • ग्रीन हाउस प्रभाव किस गैस से प्रभावित होता है – कार्बन डाईऑक्‍साइड
  • वायुमंडल में वार्षिक तापमान वृद्धि कहलाता है – ग्‍लोबल वार्मिंग
  • रासायनिक यौगिक का सबसे छोटा यूनिट है – अणु
  • शीतरक्‍तीय प्राणी कौन-सा है – छिपकली
  • ट्यूब लाइट में भरी होती है – पारे की वाष्‍प एवं आर्गन
  • टायफाइड किस अंग को प्रभावित करता है – आंत
  • हीरा का आपेक्षिक घनत्‍व तथा अपवर्तनांक है – 3.51 gm/cm³ और 2.42
  • भारी जल का अणुभार कितना होता है – 20
  • RDX का अन्‍य नाम है – साइक्‍लोनाइट
  • प्राटॉन का भार इलेक्‍ट्रॉन के भार का कितना गुना होता है – 1836 गुना
  • रेटिना पर किस प्रकार का प्रतिबिम्‍ब बनता है – वास्‍तविक और उल्‍टा
  • सीसा एवं टिन का मिश्रण कहलाता है – सोल्‍डर
  • एक गैलेन में कितना लीटर होता है – 4.54 लीटर
  • नींद का अध्‍ययन कहलाता है – हिप्‍नोलॉजी
  • रेडियोसक्रियता की इकाई होती है – क्‍यूरी
  • रक्‍त प्रवाह को रोकने में प्रयोग किया जाता है – फेरिक क्‍लोराइड का
  • रूधिर को थक्‍का जमने में सहायक होता है – प्‍लेटलेट्स
  • मस्तिष्‍क तथा सिर के अध्‍ययन से संबंधित है – फ्रेनोलॉजी
  • सबसे अधिक तथा सबसे कम तरंगदैर्ध्‍य होता है – क्रमश: लाल तथा बैंगनी रंग का
  • एक माध्‍यम से दूसरे माध्‍यम में प्रवेश करते समय प्रकाश के किरण का मुड़ना कहलाता है – प्रकाश का अपवर्तन
  • एनीमोमीटर से क्‍या मापा जाता है – हवा की शक्ति तथा गति
  • एक फर्मी में कितना मीटर होता है – 10¯¹⁵ मीटर
  • लाल और हरा रंग के मिलाने से बनता है – पीला रंग
  • एल्‍कीन का सामान्‍य सूत्र क्‍या है – CnH₂n
  • सोडियम को किस द्रव में रखा जाता है – किरोसीन में
  • DNA संरचना का मॉडल किसने दिया था – वॉटसन और क्रिक ने
  • सजातीय ध्रुव एक-दूसरे को करते है – प्रतिकर्षित
  • पारे का क्‍वथनांक क्‍या है – 357
  • UHF बैंड को दर्शाया जाता है – 300 MHz से 3000 MHz द्वारा
  • इलेक्‍ट्रॉन वोल्‍ट निम्‍न का मात्रक है – ऊर्जा
  • ध्‍वनि-तरंग अपने साथ क्‍या ले जाती है – ऊर्जा
  • पूर्ण आतंरिक परावर्तन के लिए आपतन कोण का मान कितना होना चाहिए – क्रांतिक कोण से अधिक
  • विदुत बल के तन्‍तु का ताप अधिकतम तब होगा, जबकि उसका रंग – सफेद होता है
  • 1 कूलॉम आवेश में इलेक्‍ट्रॉन संख्‍या होगी – 6.2510¹⁸
  • प्रेशर कुकर खाना पकाने के समय को कम कर देता है, क्‍योंकि – कुकर के अन्‍दर जल के क्‍वथनांक में वृद्धि हो जाती है
  • किसी चालक पर विदुत आवेश की उपस्थिति ज्ञान करने के लिए प्रयोग करते है – स्‍वर्ण-पत्र विदुतदर्शी
  • घर्षण विदुत के आविष्‍कारक थे। – थेल्‍स
  • सबसे अधिक प्रतिरोध होता है – वोल्‍टमीटर का
  • कमरे के ताप पर द्रव अवस्‍था में रखने वाली धातु है – पारा
  • दो समतल समान्‍तर दर्पणों के बीच रखी वस्‍तु के बने प्रतिबिम्‍ब की संख्‍या कितनी होगी – अनंत
  • रक्‍त में एण्‍टीबॉडी एवं एण्‍टीजन के अध्‍ययन को क्‍या कहते है – सीरोलॉजी
  • विषाणु वृद्धि करता है – जीवित कोशिका में
  • गैलवेनीकरण में लोहे के पृष्‍ठ पर विलेपित करता है – जस्‍ता
  • उदासीन जल का pH मान क्‍या होता है – 7
  • हाइड्रोजन का कौन्‍-सा समस्‍थानिक रेडियोसक्रिय है – ट्राइटियम
  • कृत्रिम ढंग से मोती की प्राप्‍ती सीपों को पालकर किस विधि से प्राप्‍त की जाती है – पर्लकल्‍चर
  • जल की बूँद किस कारण गोलीय होती है – पृष्‍ठ तनाव
  • एक स्‍त्री की आवाज का पुरूष की आवाज से अधिक तीक्ष्‍ण होने का कारण है – उच्‍चतर आवृति
  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्‍द्र कहां स्थित है – त्रिवेन्‍द्रम
  • कैलामाइन अयस्‍क किसका स्‍त्रोत है – जस्‍ता
  • बैट्री के ऋण ध्रुव से जुड़े हुए इलेक्‍ट्रोड को क्‍या कहा जाता है – कैथोड
  • भारी जल का क्‍वथनांक होता है – 101.4(लगभग)
  • विटामिन C का रासायनिक नाम है – एस्‍कार्बिक अम्‍ल
  • धोवन सोडा का रासा‍यनिक नाम क्‍या है – सोडियम कार्बोनट